सोमवार, 6 अप्रैल 2020

समय की एजेंसी-23

स्वयं का प्रबंधन कैसे करें?

 

किसी कार्य के सफल क्रियान्वयन के लिए समय के साथ प्रबंधन आवश्यक है अर्थात् अपने समस्त कार्यो व गतिविधियों का उपलब्ध समय के साथ प्रबंधन करना होगा। इसके लिए आवश्यक है कि हम प्रतिदिन किए जाने वाले कार्यों की सूची बनाकर कार्य करें। हमें कार्यों और उपलब्ध समय का नियोजन करना होगा। यदि हम बिना योजना के कार्य करेंगे तो कभी भी अपने समय का प्रभावी उपयोग नहीं कर पायेंगे। डियान एम.रूबलिंग ने योजना के महत्त्व पर विचार रखते हुए कहा है, ‘आप इधर-उधर टहलते हुए कभी भी माउंट एवरेस्ट पर नहीं चढ़ते हैं।’           वास्तव में बिना योजना बनाए हम कुछ भी नहीं कर सकते और छोटी योजना सदैव प्रभावकारी, तात्कालिक, परिणामदायक, अभिप्रेरक व सफल होती है। अपने समय का सदुपयोग करने के लिए हम अधोलिखित प्रक्रिया का पालन कर सकते हैं-

1.    सर्वप्रथम हम किए जाने वाले कार्य को छोटे-छोटे अंशों में विभाजित कर लें क्योंकि कार्य को वास्तव में पूर्ण करने के लिए विभिन्न चरणों से गुजरना होता है। मनोवैज्ञानिक दृष्टि से भी बड़े-बड़े कार्याें की अपेक्षा छोटे-छोटे कार्यों के लिए मनोबल प्रभावी होता है।2.     कार्य के प्रत्येक अंश के लिए हम तथ्यात्मक रूप से निर्धारित कर लें कि इस कार्य में कितना समय लगाया जाना चाहिए। वैज्ञानिक प्रबंध के जनक एफ.डब्ल्यू.टेलर ने इस क्रिया को समय अध्ययन(Time Study) कहकर संबोधित किया है। श्री टेलर के अनुसार किए जाने वाले कार्य की गतिविधियों का अध्ययन (Motion Study) भी कार्य के लिए समय निर्धारित करने में उपयोगी रहता है। गतिविधियों का अध्ययन करके किसी कार्य से अनावश्यक गतिविधियों को हटाकर उसमें लगने वाले समय को कम किया जा सकता है। इस प्रकार हम उस कार्य में लगने वाले समय को कम करके समय का कुशलतम उपयोग करने की तरफ बढ़ सकते हैं।
3.     प्रातःकाल संपूर्ण दिन में किए जाने वाले छोटे-बड़े सभी कार्यों की सूची बना लें ताकि कोई कार्य छूटे नहीं और कार्य के महत्व व आवश्यकता को देखते हुए उसके लिए समय निर्धारित किया जा सके।
4.     अपने विभिन्न कार्यों की प्राथमिकता का निर्धारण करें कि पहले कौन सा कार्य किया जाना है और उसके बाद कौन सा? इस प्रकार किए जाने वाले कार्याें के क्रम का निर्धारण करके हम हड़बड़ी और उतावलेपन के बिना अपने कार्यों को गुणवत्ता के साथ पूरा कर सकेंगे।
5.     हमें अपने लिए उपलब्ध 24 घण्टे के समय के लिए समय सारणी बनाकर कार्य करना चाहिए ताकि हम अपने प्रत्येक पल का सदुपयोग कर सकें। हमें समय सारणी बनाकर काम तो करना है किंतु ऐसा न हो कि हम समय सारणी तक ही सीमित रह जाएं। समय सारणी ही हमारे तनाव का कारण बन जाए। हमें सदैव ध्यान रखना होगा कि समय सारणी हमारे लिए केवल एक उपकरण मात्र है। उसमें कोई सकारात्मक परिवर्तन की आवश्यकता है तो आप अपनी समय सारणी में जब चाहे परिवर्तन कर सकते हैं। आखिर वह आपकी अपनी है।
6.     अपनी समय सारणी को इतना अधिक व्यस्त न बनायें कि उसमें सोचने समझने और अपने व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए अवकाश ही न रहे। समय सारणी में अपने लिए समय अवश्य रखें। आखिरकार हम जीवंत मनुष्य हैं कोई मशीन नहीं। हमें निश्चित रूप से व्यस्त रहना है किंतु साथ ही स्वस्थ और मस्त भी रहना है। सामान्य कहावत भी है कि स्वस्थ रहो, व्यस्त रहो, मस्त रहो। व्यस्तता हमारी मस्ती का आधार बननी चाहिए, तनाव का नहीं। हम व्यस्त रहेंगे तो दुःखी होने के लिए तो क्या, सुखी होने के लिए भी समय नहीं मिलेगा। हम मस्ती के साथ अपने कार्यों में लगे रहेंगे। कार्यों से सुख दुःख नहीं केवल और केवल आनंद ही मिलता है। याद कीजिए आपके किसी प्रोजेक्ट की सफलता के बाद आप को कितना आनंद मिला, कितनी मानसिक संतुष्टि का अनुभव आपने किया? उसी आनंद को आप प्रतिपल पा सकते हैं, जब आप प्रतिपल के लिए निर्धारित कार्य को पूर्ण कर लेते हैं। केवल बड़े प्रोजेक्ट ही नहीं, छोटे-छोटे कार्य भी पूर्ण होते हैं। आप उनकी पूर्णता के आनंद को अनुभव कीजिए और फिर आपका जीवन आनंदपूर्ण ही नहीं आनंदमय हो जायेगा।
7.     हमें निःसन्देह सभी कार्यों को पूर्ण करना है किंतु वह तब होगा, जब हम स्वयं स्वस्थ व आनंदित रहेंगे। स्मरण रखें हम कार्य स्वयं के आनन्द के लिए, परिवार व समाज के विकास के लिए करते हैं। अन्ततः सभी कार्य व्यक्ति के लिए हैं, व्यक्ति कार्यांे के लिए नहीं। कार्य करते हुए अपनी स्वास्थ्य आवश्यकताओं को न भूल जाएं। आप कार्य करते हुए ही बीच-बीच में जल का सेवन आवश्य करें। निश्चित अंतराल के बाद अल्पाहार करने में क्या समस्या है? अरे आपको काम करते हुए दो घण्टे हो गये, आपने अपनी पाॅकेट डायरी में लिखे हुए कोटेशन को तो पढ़ा ही नहीं, वह आपको कितना प्रेरित करता है। ये छोटे छोटे विश्राम आप हर घण्टे कर सकते हैं। इसके लिए आपको अपनी दिनचर्या से या अपने बाॅस से (भले ही वह आपकी पत्नी ही क्यों न हो?) अनुमति की आवश्यकता नहीं है। नितांत एकांतिक क्षणों में भी आपके/आपकी पति/पत्नी आपको पोजीशन बदलकर अपने बालों को ठीक करने से नहीं रोकेगें/रोकेंगी। वरन् परिवर्तन आपके/आपकी पति/पत्नी को भी पसंद आयेगा।
8.     अपनी नियमित दिनचर्या का अवलोकन करें और देखें, आप कितना समय ऐसे कार्यों में लगाते हैं, जो अनावश्यक व अनुपयोगी हैं। उनमें से समय निकालकर अन्य महत्त्वपूर्ण कार्य करने के लिए समय आवंटित किया जा सकता है। अपनी दिनचर्या में एक भी पल के बर्बाद होने का अवकाश न छोड़े किंतु आपकी दिनचर्या में नीरसता या बोर होने का भी अवकाश नहीं होना चाहिए। आपकी दिनचर्या में मनोरंजन के लिए स्थान हो या नहीं आनंद के लिए स्थान अवश्य होना चाहिए।
9.     अनावश्यक मीटिंगों, मुलाकातों व चर्चाओं से बचें। प्रत्येक बात का जबाब देना आवश्यक नहीं है और न ही प्रत्येक बात को सुनना आवश्यक है। अरे भाई! देश में 125 करोड़ जनसंख्या है। हम सभी से तो नहीं मिल सकते, फिर हम सभी के लिए उपलब्ध रहने के प्रयत्न क्यों करें? कुछ लोग दूसरे के कानों में उड़ेलने के लिए कूड़ा-करकट लिए घूमते रहते हैं, ऐसे व्यक्तियों से बात करने से बचें। केवल काम की बातें करें। अनावश्यक बातें करने वाले अपना समय तो बर्बाद करते ही हैं। हमारा समय भी बर्बाद करते हैं।
           कर्मशील मनुष्य को महात्मा बुद्ध की उक्ति को सदैव याद रखना चाहिए, ‘मौनं सवार्थ साधकम्’ अर्थात् मौन ही सभी लक्ष्यों को प्राप्त करने का साधक है। अतः प्रत्येक व्यक्ति की बात का जबाब देना और प्रत्येक क्रिया पर प्रतिक्रिया देना आवश्यक नहीं है। जब आप सामने वाले की बात के आधार पर निर्णय करने लगते हैं तो आपने हार मानकर अपने आपको उसके हवाले कर दिया। अरे भाई! आज का दिन मेरा है, आज के लिए उपलब्ध समय मेरा है फिर इसे मैं दूसरे को क्यों प्रदान करूँ? इस समय में क्या करना है? कब करना है? कैसे करना है का निर्धारण केवल मैं और केवल मैं करूँगा। कोई दूसरा मुझे गाली देकर या अपमान करके भी डिस्टर्ब नहीं कर सकता। मेरा व्यक्तित्व इतना कमजोर नहीं कि जो चाहे अपनी बात मनवा सके।


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