मंगलवार, 12 जनवरी 2021

युवा दिवस के रूप में विवेकानन्द जयन्ती

 आज १२ जनवरी है, स्वामी विवेकानन्द की जयन्ती। भारत अनादिकाल से ही ऋषियों और सन्तों की भूमि रहा है। सन्तों के प्रभाव के कारण ही भारत में भौतिकवाद की अपेक्षा आध्यात्म का प्रभाव अधिक रहा है। असख्यों संतो के केवल सीमित मार्ग अपनाने के कारण भारत को अधविश्वासों का देश भी कहा जाता रहा है। सामान्यतः साधु-सन्तों के बारे में माना जाता रहा है कि वे अपनी मुक्ति की कामना की पूर्ति के लिए संसार के दायित्वों से मुखमोड़कर तपस्या में लीन हो जाते हैं और अपनी आत्मा को परमात्मा में विलीन कर देते हैं। इस प्रकार सन्त नितान्त स्वार्थी कहे जा सकते हैं। केवल अपने लिये साधना करना स्वार्थ नहीं, तो और क्या है?  इसी को झुठलाते हुए विवेकानन्द जैसे अनेकों सन्तों ने भारत के विकास में अमूल्य योगदान दिया है।

स्वामी विवेकानन्द पारंपरिक साधु नहीं थे। उन्होंने अपनी मुक्ति के लिए तपस्या नहीं करनी थी। उनके लिए नर ही नारायण  रूप था। उन्होने आजीवन कमजोर वर्गों के उत्थान के लिये प्रयास किए। नारी शिक्षा पर उन्होंने विशेष जोर दिया। वे आध्यात्मिक विकास के साथ-साथ भौतिक विकास के भी हिमायती रहे। उनकी ही संचेतना व अभिप्रेरणा राष्ट्रीय स्वतन्त्रता संग्राम में काम कर रही थी। स्वामी विवेकानन्द कर्म योग और राज योग पर विशेष जोर देते रहे। उन्हें कुछ लोगों द्वारा राजऋषि कहकर भी संबोधित किया जाता है।

    स्वामी जी निर्धन और पीड़ित में शिव रूप देखते थे। स्वामी जी की अपेक्षाओं के अनुरूप भारत निर्माण अभी तक भी नहीं हो पाया है। स्वामी जी के विचारों को अभी भी कार्यरूप में परिणत करने की आवश्यकता है। स्वामी जी एक सशक्त भारत देखना चाहते थे। भारत में जबतक एक भी व्यक्ति भूखा और शिक्षा से वंचित है। स्वामी जी का कार्य अधूरा है, जिसे स्वामी जी हमारे लिए छोड़कर गये हैं।

     अतः आज स्वामी जी के जन्म दिवस के अवसर पर हमें युवा दिवस मनाने की औपचारिकता मात्र से आगे बढ़कर उनके सपनों के भारत के निर्माण के लिए अपने आप को समर्पित करने की आवश्यकता है।वर्तमान में भारत की जनसंख्या में लगभग 50 प्रतिशत युवा हैं। स्वामी विवेकानन्द के जन्म दिन को युवा दिवस के रूप में मनाकर हम युवाओं को उनके उत्तरदायित्व का भान कराना चाहते हैं। भारतीय युवाओं को आगे बढ़कर युवा भारत का निर्माण करना है। कुशल भारत का निर्माण करना है। विकसित भारत का निर्माण करना है। भूख, गरीबी और अशिक्षा मुक्त भारत का निर्माण करना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 इस कार्य में हमारी सहयोगी बनेगी ऐसी आशा है।