गुरुवार, 17 जुलाई 2014

सफलता की प्रक्रिया को स्वीकार करेंः

सफलता की प्रक्रिया को स्वीकार करेंः 

आप सफलता के आनन्द की अनुभूति तभी कर पायेंगे, जब आप स्वीकार करेंगे कि आपके द्वारा किए गये प्रयास सफल हुए हैं। अतः सफलता की प्रक्रिया को जानना व उसे स्वीकार करना आवश्यक है। सफलता को स्वीकार करने का आशय केवल उपलब्धियों को स्वीकार करने से नहीं है। इसका आशय सफलता की संपूर्ण प्रक्रिया को स्वीकार करने से है। जीवन में असंख्यों सफलताएँ मिलती हैं, जिन्हें हम स्वीकार न करके आनन्द की अनुभूति से वंचित रह जाते हैं और काल्पनिक असफलताओं से परेशान होते रहते हैं।
            वास्तविक रूप से कोई भी व्यक्ति असफल नहीं होता। जो व्यक्ति काम करता है, उसका परिणाम भी प्राप्त होता है। प्रयासों में जितनी तीव्रता और प्रभावशीलता होगी, तदनुकूल उपलब्धियाँ या अनुभवकी प्राप्ति होगी। प्रयास करने से हमें उपलब्धियाँ मिलें या अनुभव, प्रयास तो सफल ही होने हैं। आवश्यकता उस सफलता को समझने व स्वीकार करने की है। फेसबुक पर अर्चना पाठक, मुख्याध्यापिका, नेशनल कान्वेंट स्कूल, 27/27 मंगलवार घाट, होशंगाबाद(मध्य प्रदेश) द्वारा तितली के सुन्दर से चित्र के साथ मुस्कराहट के लिए अभिप्रेरक व जिन्दगी में सफलता का नुस्खा कुछ इस तरह से बयां किया था-

‘जिंदगी उन्हीं को आजमाती है, जो हर मोड़ पर चलना जानते हैं, कुछ पाकर तो हर कोई खुश रहता है, पर जिन्दगी उसी की है, जो खोकर भी मुस्कराना जानते हैं.............’

     


          प्रसिद्ध लेखक रॉबर्ट एच शूलर की एक पुस्तक है, ‘टफ टाइम्स नेवर लास्ट, टफ पीपुल डू’। इसमें समस्या यानी अंधेरे के पीछे छिपे समाधान और उजाले के लिए वह कहते हैं, ‘हर समस्या संभावनाओं से भरी है। आप अपने पहाड़ को सोने की खदान में बदल सकते हैं। इसके लिए व्यक्ति को अपने मन में इस बात को भली-भांति स्वीकार कर लेना चाहिए कि समस्याएँ और जीवन में आने वाले अंधेरे जिंदगी का एक अहम् हिस्सा है। उन्हें पार करके ही हम उजालों में प्रवेश कर सकते हैं और अपने व्यक्तित्व को सफल बना सकते हैं। सफलता को स्वीकार करने से पूर्व हमें सफलता की प्रक्रिया यानी संघर्ष को भी स्वीकार करना होगा। अच्छा हो हम इसे प्रसन्नता के साथ स्वीकार करें और हमारे चेहरे से क्षण भर के लिए भी मुस्कराहट न हटे।


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