बुधवार, 23 जुलाई 2014

सफलता की अनुभूति करें:


सफलता हम सभी को अच्छी लगती हैं, किन्तु मर्ज बढ़ता ही गया, ज्यों-ज्यों दवा की। हम जैसे-जैसे बड़े होते हैं, हमारी अपेक्षाओं में वृद्धि होती जाती है किन्तु इसके साथ ही साथ अपने प्रयासों में प्रबंधन को नजरअन्दाज करने लगते हैं। हम जैसे-जैसे बड़े होते हैं, यह भूल जाते हैं कि हम जो भी प्रयास सुप्रबन्धित ढंग से करते हैं, उन प्रयासों का परिणाम जो सुफल लेकर आता है, वही फल तो प्रयासों को सफल करता है। प्रयासों का परिणाम ही तो प्रयासों को सफल करता है। हम सफलता की कामना करते हैं और शायद सफल होते भी हैं, किन्तु सफलता की अवधारणा को न समझने के कारण, सफलता का आनन्द नहीं ले पाते। सफलता का संबन्ध प्रयासों से होता है। हमारे छोटे-छोटे प्रयासों के परिणामस्वरूप हमें जीवन में प्रतिदिन सफलताएं मिलती हैं। प्रयासों के आकार के अनुसार ही सफलताओं का आकार होता है। हमें छोटे प्रयास से कभी बड़ी सफलता नहीं मिल सकती। आप बाजार में जाकर 1000 रुपयें में हवाई जहाज खरीदने का सपना तो नहीं पाले हुए? यदि ऐसा है तो आपको निराशा का सामना करना अवश्यंभावी है। अतः हमें अपने प्रयासों व उनसे प्राप्त परिणामों को समझने की आवश्यकता है। 
सफलता को समझे बिना हम उसका आनन्द नहीं उठा सकते यह ठीक उसी प्रकार है कि औषधि आपके पास है किन्तु आप उसके महत्व व उपयोग के तरीके को न जानने के कारण अस्वस्थ हैं; जैसे ही आपको पता चलता है कि अरे! यही तो औषधि है जिसके सेवन से आरोग्य प्राप्त कर में आनन्द का उपभोग कर सकता हूँ। आप आनन्द के हकदार हो जाते हैं अर्थात पहले से ही उपलब्ध संसाधनों से आप आनन्द का उपभोग करने लगते हैं। यही बात सफलता के आनन्द का उपभोग करने के लिए भी है। सफलता सुप्रबंधन के साथ किए गये आपके प्रयासों का एक अनिवार्य परिणाम होता है और सफलता आनन्द प्राप्त करने का संसाधन है। दूसरे शब्दों में हम कहें सफलता ही तो व्यक्ति को आनन्द की अनुभूति कराने का जादू है, आओ हम इस जादू का परिचय प्राप्त करें।

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