बुधवार, 23 जुलाई 2014

धन और मान दोनों ही आकर्षक हैं!


किसी विद्यालय की दीवार पर कहीं पढ़ा था-

अधम मरत फँस धनहि में मध्यम धन और मान।
ऊँचे केवल मान में,  फँसते नहीं महान।

इस काव्यांश के एक-एक शब्द पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। इसका आशय है कि निम्न श्रेणी के व्यक्ति धन की चिन्ता में ही फँसकर रह जाते हैं और धन को जुटाते हुए ही अपने प्राण त्याग देते हैं। मध्यम श्रेणी अर्थात मध्यमवर्गीय व्यक्ति व प्रतिष्ठा की चिंता करते-करते जीवन व्यतीत कर देते हैं। जिन लोगों को हम बड़े लोग कहते हैं, वे अपनी प्रतिष्ठा को लेकर तरह-तरह के कर्म करते दिखते हैं। कई बार तो प्रसिद्धि के लिए कुकर्म भी कर बैठते हैं। वास्तव में वे भी महान नहीं कहे जा सकते, क्योंकि वे प्रसिद्धि की आकांक्षा में अपनी स्वतंत्रता का मर्दन करते हैं। 
        प्रसिद्धि वास्तव में क्या है? जन-संचार माध्यमों में छा जाना।  जनसंचार माध्यम वे माध्यम कहलाते हैं, जिनका उपयोग विचार या सूचना को जनसाधारण तक पहुँचाने के लिए किया जाता है। जन संचार माध्यम ही मीडिया के नाम से संबोधित किए जाते हैं। आप मीडिया में छा जाने को सफलता कहते हैं! क्या बचकानी बात है। क्या होता है उससे? शायद कुछ क्षणों के लिए आपको कुछ लोग जान जाते हैं, किंतु क्या फायदा यदि आप स्वयं अपने आपको भूल जायें। वास्तव में महान या सफल उन व्यक्तियों को ही कहा जा सकता है, जो धन और मान किसी में नहीं फँसते। 
             मेरे विचार में चार वस्तुएँ ऐसी हैं, जो व्यक्ति को कमजोर करती हैं और व्यक्ति अपने ढंग से जीवन जीने में असफल हो जाता है। उसे कदम-कदम पर समझौते करने पड़ते हैं या कदम-कदम पर अपनी आत्मा को मारना पड़ता है और वे चार वस्तुए या तत्व हैं- 1. धन, 2. पद, 3. यश और 4. सम्बंध। यदि व्यक्ति इन चार के लोभ को नियन्त्रित कर सके तो वह निश्चय ही सफल होता है। उसे दुनिया की कोई भी शक्ति झुका नहीं सकती। उसे अपनी आत्मा की आवाज को कुचलना नहीं पड़ता। उसे किसी की चाटुकारिता नहीं करनी पड़ती। उसको किसी के सामने दुम हिलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

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