शनिवार, 6 दिसंबर 2014

कुशल प्रबन्धक के गुण-८

प्रबंधन सूत्र-

1. कहानी के प्रथम भाग से निष्कर्ष निकलता है कि धीमे चलने वाला भी निरंतर प्रयास रत रहते हुए; तेज चलने वाले अतिआत्मविश्वासी व सुस्त व्यक्ति को हरा सकता है।
2. कहानी के दूसरे अनुच्छेद से निष्कर्ष निकलता है कि तेज व निरंतर प्रयासरत हमेशा धीमे व निरंतर प्रयासरत को हरा देता है। लगातार काम करना अच्छा है किन्तु तेज व लगातार काम करना उससे भी अच्छा है। स्मार्ट वर्कर सामान्य वर्कर से सदैव आगे रहेगा।
3. तीसरे अनुच्छेद से निष्कर्ष निकलता है कि कार्य करने से पूर्व अपनी वास्तविक क्षमता को पहचानो और अपनी क्षमता के अनुसार ही कार्यक्षेत्र का चुनाव करो। अपनी क्षमता के अनुसार कार्य करके आपकी प्रगति के मार्ग खुलते ही जायेंगे।
4. वैयक्तिक रूप से क्षमता होना व अभिप्रेरित होना अच्छा है किन्तु सामाजिक हित में टीम के रूप में ही काम करना श्रेष्ठतम् परिणाम देता है। वास्तव में हमारे सारे प्रयास सहयोग व समन्वय के साथ होने चाहिए। टीम के रूप में कार्य करके ही वैयक्तिक व सामाजिक सफलता को सुनिश्चित किया जा सकता है।
5. स्मरण रखें अन्त तक न तो कछुआ और न ही खरगोश असफलता के बाद निराश हुए और काम से भागे वरन् असफलता से सीख लेकर पुनः प्रयास किए और अन्ततः दोनों ने आनन्द, सन्तुष्टि और विजय प्राप्त की। ध्यान रखें असफलता एक ऐसी घटना है जो हमें मूल्यवान अनुभव देती है, हमारे मार्ग को बाधित नहीं करती। असफलता ही हमें सफलता के मार्ग को दिखाती है। वस्तुतः असफलता सफलता की प्रक्रिया का ही एक घटक है। 

‘यदि आप पहले के मुकाबले बेहतर परिणाम चाहते हैं तो सौहार्दपूर्ण तरीके से कार्य करने और महत्वपूर्ण लोगों का सहयोग प्राप्त करने की कोशिश करें। जब भी कठिन परिश्रम की बात आए तो कभी अपना बचाव न करें। जार्ज बर्नाड शॉ नेे कहा है कि, जो अपना दिमाग नहीं बदल सकते वे कुछ नहीं कर सकते।’ अतः ध्यातव्य है कि अन्ततः व्यक्तिगत हार-जीत या उपलब्धियाँ नहीं सामाजिक उपलब्धियाँ अधिक महत्वपूर्ण होती हैं और बड़े व महत्वपूर्ण उद्देश्यों के लिए सहयोगी प्रतिस्पर्धा ही महत्वपूर्ण होती है। 
सभी के लिए विकास सुनिश्चित करना किसी भी कल्याणकारी शासन की ही नहीं, प्रत्येक परिवार की भी प्राथमिकताओं में होता है। संगठन व संस्था का विकास करना भी सभी के लिए विकास को सुनिश्चित करने का एक उपकरण होता है। सभी के लिए शिक्षा इसी का एक प्रयास है किंतु सभी के लिए विकास सुनिश्चित करने के लिए केवल सामान्य शिक्षा ही पर्याप्त नहीं है, इसके लिए प्रबंधन की शिक्षा आवश्यक है। प्रबंधन की शिक्षा का आशय प्रबंधन की डिग्रियों से नहीं है। सभी के लिए प्रबंधन की शिक्षा के लिए व्यापक पैमाने पर अनौपचारिक शिक्षा के माध्यमों व जनसंचार माध्यमों का प्रयोग करना होगा तभी सभी को उनके मामलों के प्रबंधन के लिए कुशल प्रबंधक के रूप में विकसित किया जा सकेगा। सभी को कुशल प्रबंधक के रूप में विकसित करके ही सभी अपना प्रबंधन करने में कुशल हो सकेंगे। अपने निर्णय स्वयं कर सकेंगे। अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकेंगे। हम टीम भावना के साथ कार्य कर सकेंगे। अपने प्रबंधक आप बनकर ही हम विकास की उत्तरोत्तर सीढ़ियाँ चढ़ते हुए सामाजिक विकास में योगदान दे सकेंगे।

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