बुधवार, 17 सितंबर 2014

6. नियंत्रण:

6. नियंत्रण: 


नियोजन के अनुसार कार्य का निष्पादन करने के लिए नियंत्रण की आवश्यकता पड़ती है। नियंत्रण के बिना नियोजन हवाई कल्पना मात्र बनकर रह जायेगा। अतः नियंत्रण प्रबंधन प्रक्रिया का एक अनिवार्य घटक है। प्रो. हेमैन के शब्दों में ‘‘नियंत्रण जाँच-पड़ताल के द्वारा यह तय करने की प्रक्रिया है कि योजना के अनुसार कार्य किया जा रहा है कि नहीं, और यदि कोई अन्तर दिखाई दे तो उसको सुधारने के लिए आवश्यक कार्यवाही करना।’’ नियंत्रण का आधार निःसन्देह नियोजन होता है किन्तु नियंत्रण भविष्य के लिए किया जाता है। यदि पिछले कामों में किसी प्रकार की कमी रह गई है तो सुधारात्मक कार्यवाही करके यह सुनिश्चित किया जाता है कि भविष्य के लिए निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके। नियंत्रण में सामान्यतः चार कदमों को सम्मिलित किया जाता है-

क. प्रमाप तैयार कर जवाबदेही सुनिश्चित करना।
ख. वास्तविक कार्य का आकलन करना।
ग. नियोजित प्रमाप व वास्तविक कार्य के आकलन में तुलना करके विचलनों का पता लगाना।
घ. विचलनों का विश्लेषण करके आवश्यक सुधारात्मक कार्यवाही करना। 

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