रविवार, 14 सितंबर 2014

2. नियोजन करना:

2. नियोजन करना:

 प्रबंधन का सबसे महत्वपूर्ण व प्रथम कृत्य नियोजन है। नियोजन भविष्य के गर्भ में झाँकने की प्रक्रिया है। वास्तव में नियोजन से ही भावी प्रयासों की गाथा लिखी जाती है। पीटर ड्रकर ने भी लिखा है, ‘प्रबंधन के समक्ष भविष्य को पूर्वानुमानित करने तथा उसको अपने अनुसार बनाने का प्रयास करने के अतिरिक्त अन्य कोई विकल्प नहीं है।’ हेन्स तथा मैसी ने ठीक ही कहा है कि नियोजन एक बौद्धिक प्रक्रिया है जिसके लिए सृजनात्मक विचारधारा तथा कल्पना की आवश्यकता होती है। नियोजन कार्य करने से पूर्व विचार करने की प्रक्रिया है। नियोजन के महत्व को साहित्यकार गिरधर ने अपनी कुण्डली में भी स्वीकार किया है-

बिना विचारे जो करे, सो पाछे पछताय।
काम बिगारे आपनो, जग में होत हँसाय।
जग में होत हँसाय, चित्त में चैन न पावै।
खान-पान, सम्मान, राग-रंग, मनहिं न भावै।
कह गिरधर कविराय, दुःख कछु टरहि न टारे;
खटकत है जिय माहि, कियो जो बिना विचारे।
           
   काम करने से पूर्व विचार करना ही तो नियोजन है। बिना विचार किए गये कार्य से सफलता की अपेक्षा दुःख ही प्राप्त होगा। हैमन ने भी यही लिखा है, ‘‘क्या किया जाना है? इसका पूर्व निर्धारण ही नियोजन है। नियोजन एक व्यापक व निरन्तर प्रक्रिया है। व्यक्ति की सफलता कुशल एवं उचित नियोजन पर ही निर्भर है। रामायण में भी कहा गया है, ‘‘योजना यह सोचकर करो कि आप अमर हैं; पर अमल करते समय,कार्यान्वयन के समय सोचो कि मृत्यु सम्मुख खड़ी है।’’ वास्तव में रामायण की इस उक्ति से नियोजन व उसके क्रियान्वय के महत्व को समझा जा सकता है।
          कुण्टज एवं ओ‘डोनेल के अनुसार, ‘‘क्या करना है? इसे कैसे करना है? इसे कब करना है? और इसे किसे करना है? का पूर्व निर्धारण ही नियोजन है।’’ चीन के दार्शनिक कन्फ्यूशियस ने भी लिखा है, ‘‘जो लोग योजनाबद्ध ढंग से कार्य नहीं करते हैं, वे लोग अपने को मुसीबत में डाल देते हैं। योजनाबद्ध रूप से कार्य करने से कार्य भी संपन्न होता रहता है और कर्ता के आत्मविश्वास में वृद्धि भी होती रहती है, योजनाबद्ध ढंग से कार्य करने पर परिस्थितियाँ भी अनुकूल बनती चली जाती हैं।’’
            एटचिसन और हिल ने नियोजन करने की संपूर्ण तकनीकी तीन सरल प्रश्नों के जरिए अभिव्यक्त की है। उनके अनुसार हमें कार्य करने से पूर्व स्वयं से पूछना चाहिए कि-

क. हम कहाँ हैं? अर्थात वर्तमान स्थिति का आकलन।
ख. हमें कहाँ पहुँचना है? अर्थात उद्देश्य का निर्धारण, और
ग. हमें वहाँ कैसे पहुँचना है? अर्थात कार्ययोजना बनाना।

           नियोजन को ओर अधिक स्पष्ट करने के लिए पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रयुक्त छः ककारों का सहारा लिया जा सकता है। क्या? कौन? कहाँ? कब? क्यों? कैसे? समाचार संकलन के लिए घटित घटना पर लागू करते हैं। प्रबंधन के क्षेत्र में इसे भविष्य में किये जाने वाले प्रयासों पर लागू कर दें तो नियोजन की प्रक्रिया समाहित हो जाती है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि ‘क्या किया जाना है? कौन करेगा अर्थात किसके द्वारा किया जाना है? कहाँ किया जाना है? कब किया जाना है? क्यों किया जाना है? व कैसे किया जाना है का पूर्व निर्धारण ही नियोजन है।’’
           इस प्रकार नियोजन का आशय हम जहाँ हैं? से हम जहाँ पहुँचना चाहते हैं के अन्तर को पाटने के लिए मार्ग का निर्धारण करने से है। विक्टर ह्यूगो ने कहा है कि दिन में किये जाने वाले कार्यो के सन्दर्भ में जो व्यक्ति योजना बना लेता है, उसके हाथ एक ऐसा सूत्र लग जाता है, जो सर्वाधिक व्यस्त जीवन की भूल-भुलैयों में उसका मार्गदर्शन करते हुए उसको पार ले जाता है।

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