सोमवार, 28 जून 2010

मानव संसाधन प्रबंधक के कार्य

Functions Of Human Resource Manager


आओ मानव संसाधन प्रबंधक की भूमिका का अध्ययन करने के बाद उसके कार्यो की चर्चा करते हैं। जैसा कि पूर्व में उल्लेख किया जा चुका है। प्रबंध एक बहुआयामी कार्य है। इसे सामान्यत: तीन प्रकार के कार्य करने होते हैं :

अ. व्यवसाय का प्रबंध करना (Managing A Business)


ब. प्रबंधकों का प्रबंध करना (Managing Managers)


स. कार्य तथा कार्यकर्ताओं का प्रबंध करना


(Managing The Work And The Workers)

इनमें से अन्तिम दो मानव संसाधन प्रबंधक से संबधित हैं। स्पष्ट है कि मानव संसाधन प्रबंधक को प्रबंधकों का भी प्रबंध करना होता है। कार्य तथा कार्यकर्ताओं का प्रबंध भी उसी की जिम्मेदारी है। प्रबंधक, कार्य व कार्यकर्ताओं के प्रबंध करने की प्रक्रिया में उसे विभिन्न कार्या को संपन्न करना होता है, जिनका उल्लेख विभिन्न विद्वानों ने विभिन्न प्रकार से किया है। अध्ययन की सुविधा की दृष्टि से उनका वर्गीकरण निम्न प्रकार किया जा सकता है:-

क- क्रियात्मक कार्य (Operative Functions): क्रियात्मक कार्यों में उन कार्यो का अध्ययन किया जाता है, जो प्रत्यक्ष रूप से कर्मचारियों की प्राप्ति, विकास व उन्हें संगठन में बनाए रखने से संबन्धित हैं। ये कार्य निम्नलिखित हैं-

1. कर्मचारियों की प्राप्ति (Procurement)


2. कर्मचारियों का विकास (Development)


3. क्षतिपूर्ति कार्य (Compensating)


4. श्रमिकों को संगठन में बनाये रखने का कार्य (Maintenance)

ख- प्रबंधकीय कार्य (Managerial Functions) : लारेन्स एप्पले के अनुसार, ``प्रबंध अन्य व्यक्तियों से कार्य करवाने की कला है।´´ मूलत: प्रबंध का अर्थ उस प्रक्रिया से लिया जाता है जिसके द्वारा भौतिक व मानवीय संसाधनों का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों की पूर्ति करने के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया के अन्तर्गत लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु आयोजन, संगठन, नियुक्तियां, निर्देशन व नियन्त्रण आदि कार्यो को सम्मिलित किया जाता है,

1. नियोजन (Planning)


2. संगठन (Organising)


3. नियुक्तियां (Staffing)


4. निर्देशन(Directing)


5. नियन्त्रण (Controlling)



सारत: मानव संसाधन प्रबंधक के कार्यो को निम्न प्रकार संक्षिप्त किया जा सकता है :-

1. संगठनात्मक आयोजन एवं विकास- संगठनात्मक आवश्यकता का निर्धारण, संगठनात्मक ढांचे का निर्माण व व्यक्ति संबन्ध स्थापित करना।


2. जन-नियोजन- जनशक्ति आयोजन, भर्ती, चयन, स्थापन, कार्य से परिचय, स्थानान्तरण, पदोन्नति व पृथक्करण।


3. प्रिशक्षण एवं कर्मचारी विकास- क्रियात्मक प्रिशक्षण, अधिशासी विकास, प्रिशक्षण पाठयक्रम निर्धारण, जांच आयोजन व पुनरावलोकन।


4. मजदूरी एवं वेतन प्रशासन- कार्य मूल्यांकन, मजदूरी एवं वेतन प्रशासन, प्रेरणात्मक क्षतिपूर्ति व कार्य निष्पदन मूल्यांकन।


5. अभिप्रेरण- गैर वित्तीय प्रेरणा, सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं की सन्तुष्टि व समूह अभिप्रेरण एवं मनोबल वृद्धि के उपाय।


6. कर्मचारी सेवाएं : सुरक्षा, विचार-विमर्श, चिकित्सा, मनोरंजन, अवकाश, पेंशन, भविष्य-निधि व ग्रेच्युटी आदि।


7. कर्मचारी आलेख : समंक संकलन, समंक विश्लेशण, निर्णयन हेतु सूचना का विकास, सेवा पंजिका एवं सेवा आलेख।


8. श्रम संबन्ध : परिवाद निवारण, अनुशासन, श्रम नियमों को लागू करना, सामूहिक सौदेबाजी व कल्याण कार्य।


9. सेविवर्गीय शोध : सर्वेक्षण, समंक संकलन, सेविवर्गीय कार्यक्रम मूल्यांकन, आवश्यकता निर्धारण तथा परिवर्तन क्षेत्र निर्धारण, अधिक उपयुक्त कार्यक्रम व नीतियों का विकास।
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