गुरुवार, 24 जून 2010

मानव संसाधन प्रबंध : अर्थ व परिभाषा

मानव संसाधन प्रबंध : अर्थ व परिभाषा




मानव संसाधन प्रबंध, प्रबंध की एक महत्वपूर्ण शाखा है। एप्पले ने तो यहां तक कह दिया है, `प्रबंध व्यक्तियों का विकास है न कि वस्तुओं का निर्देशन......................प्रबंध एवं सेविवर्गीय प्रशासन एक ही है, उन्हें कदापि पृथक नहीं किया जाना चाहिए।´ पीटर एफ ड्रकर के अनुसार, `कर्मचारी व कार्य का प्रबंध करना ही प्रबंध का कार्य है।´ कहने का आशय यह है कि मानव संसाधन प्रबंध, प्रबंध का एक महत्वपूर्ण अंग है। मानव संसाधन विकास भी इसी के अन्तर्गत आता है। इसके अर्थ को और अधिक स्पष्टता के साथ समझने के लिए इसकी कुछ परिभाषाओं का अध्ययन उपयोगी रहेगा।


मानव संसाधन प्रबंध एक नवीन शब्द है। इसका प्रयोग पिछले 30-35 वर्षों से ही होने लगा है। इससे पूर्व इसके लिए सेविवर्गीय शब्द का प्रयोग किया जाता था। अत: यहां पर वही परिभाषा दी जा रही हैं:-

1. श्री टेरी लियोन्स के अनुसार, `सेविवर्गीय प्रबंध, प्रबंध की वह क्रिया है, जो कि इस तथ्य के कारण उत्पन्न होती है कि किसी भी उद्यम का कार्य चलाने के लिए लोगों की सेवाओं का प्रयोग करना होता है।´

2. पीगर्स एवं मायर्स के अनुसार, `सेविवर्गीय प्रशासन कार्यकर्ताओं की संभावित क्षमताओं को विकसित करने की एक विधि है, जिससे उन्हें अपने कार्य से अधिकतम सन्तुष्टि प्राप्त हो तथा संस्था को उनके परिश्रम का अधिकतम् लाभ मिले।´

3. प्रो.माइकल जे ज्यूसियस के अनुसार, `प्रबंध का वह क्षेत्र है जो कि श्रम शक्ति की प्राप्ति, संधारण तथा प्रयोग करने की क्रिया के संबध में नियोजन, संगठन, निदेशन तथा नियन्त्रण का कार्य करे, जिससे कि- (अ) कंपनी अपने संस्थापन के उद्देश्यों को मितव्ययिता तथा प्रभावकारी तरीके से प्राप्त कर सके। (आ) सभी स्तरों पर कार्य कर रहे कर्मचारी वर्ग के उद्देश्यों की अधिकतम् सीमा तक सन्तुष्टि हो सके। (इ) समाज के उद्देश्यों का उचित चिन्तन कर उनकी सन्तुष्टि की जा सके।

4. ई.एफ.एल.ब्रीच के अनुसार, `सेविवर्गीय प्रबंध प्रबंध प्रक्रिया का वह भाग है जो मुख्यत: किसी संगठन के मानवीय तत्वों से संबधित है।´

5. अमेरिकी सेविवर्गीय प्रशासन संस्थान के अनुसार, `सेविवर्गीय प्रशासन, सक्षम कार्यदल को प्राप्त करने, विकसित करने तथा संधारण करने की वह कला है जिससे संगठन के उद्देश्यों को जनशक्ति का पूर्ण उपयोग करके न्यूनतम लागत पर प्राप्त किया जा सके।´

6. भारतीय सेविवर्गीय प्रबंध संस्थान के अनुसार, `प्रबंधकीय कार्य का वह भाग जो संगठन में मानवीय संबन्धों से सम्बन्धित है, सेविवर्गीय प्रबंध कहलाता है। इसका उद्देश्य उन संबन्धों का संधारण है, जिससे संगठन में प्रभावी कार्य के माध्यम से संगठन को अधिकतम सहयोग प्राप्त हो सके।´

7. ब्रिटिश इन्स्टीट्यूट ऑफ परसोनल मैनेजमेण्ट के अनुसार, `सेविवर्गीय प्रबंध इन तत्वों से संबधित है : (अ) सेविवर्गीय भर्ती प्रणालियां, उनके चयन, प्रिशक्षण, शिक्षा तथा उनकी उपयुक्त स्थानों पर नियुक्ति, (ब) रोजगार की शर्ते, भुगतान प्रणालियां, प्रमापीकरण, कार्य की दशाएं, सुविधाएं तथा अन्य कर्मचारी सेवाएं उपलब्ध करना, (स) नियोक्ता और सेविवर्ग के मध्य सामूहिक विचार-विमर्श को प्रभावी बनाना तथा विवाद हल करने के लिए निश्चित प्रणाली स्वीकार करना।

8. सेविवर्गीय प्रशासन समिति (1958) द्वारा प्रकाशित प्रशासन की आचार संहिता के अनुसार, `सेविवर्गीय प्रशासन सक्षम कार्य-समूह को भर्ती करके, विकसित करने तथा कार्यरत रखने की वह कला है जिससे अधिकतम निपुणता तथा बचत के साथ संगठन के उद्देश्यों की पूर्ति करने के लिए कार्य करना सम्भव हो सके।´



उपरोक्त परिभाषाओं का अध्ययन करने के पश्चात् कहा जा सकता है कि `मानव संसाधन प्रबंध, प्रबंध की वह महत्वपूर्ण शाखा है जिसके अन्तर्गत संगठन के उद्देश्यों को मितव्ययिता पूर्ण व प्रभावकारी तरीके से प्राप्त करने के उद्देश्य से संगठन के विभिन्न स्तरों हेतु मानव संसाधनों को प्राप्त करके, विकास करने व उन्हें सन्तुष्टि प्रदान करते हुए संधारित करने के लिए प्रबंधकीय विधियों का प्रयोग किया जाता है।´
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