मंगलवार, 21 अक्तूबर 2014

11. प्रतिनिधित्वः

11. प्रतिनिधित्वः


 प्रबंधन का यह एक महत्वपूर्ण सहायक कार्य माना जाता है। प्रतिनिधित्व लोकतंत्र का आधार है। जीवन में हमें विभिन्न व्यक्तियों या संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करना होता है। हम जब किसी व्यक्ति को अपना कार्य सौंपकर भेजते हैं, तो स्वाभाविक रूप से वह उस समय हमारे प्रतिनिधि के रूप में हमारी तरफ से कार्यो को पूरा कर रहा होता है। संस्था के अन्दर व बाहर तो प्रबंधन प्रतिनिधित्व करता ही है। व्यक्तिगत व पारिवारिक जीवन में भी दिन-प्रतिदिन हम अनेक कार्य प्रतिनिधि बनकर करते हैं और अनेक व्यक्तियों को हम अपना प्रतिनिधि बनाते हैं। वास्तव में प्रतिनिधित्व को स्वीकार करना ही लोकतंत्र का आधार है। प्रबंधन में लोकतत्र का प्रयोग ही प्रतिनिधित्व का आधार है।
              उपरोक्त समस्त कार्य प्रबंधन के कार्यो में महत्वपूर्ण हैं किन्तु ये कार्य सर्वस्वीकृत नहीं हैं। कुछ कार्य तो आपस में अन्तर्सम्बन्धित हैं। कुण्टज तथा ओ‘डोनेल ने तो प्रबंधन के पाँच कार्यो को ही माना है- नियोजन, संगठन, नियुक्तियाँ, निर्देशन व नियंत्रण।
             वास्तव में ये पाँच कार्य अन्य सभी को अपने अन्दर समाहित किए हुए हैं। अतः इस पाँच कार्यो को सबसे अधिक स्वीकृति प्राप्त हैं। प्रबंधन के कार्यो की संख्या व उनके वर्गीकरण पर भले ही विचार-विभिन्नता हो किन्तु यह सर्वस्वीकृत तथ्य है कि प्रबंधन के कार्य सार्वभौमिक हैं जो सभी संगठनों में समान रूप से लागू होते हैं।
प्रबंधन के अनेक कार्य गिनाये जाते हैं। वास्वत में प्रबंधन के कार्य इतने व्यापक रूप से फैले हैं कि उनका गिनाना बड़ा ही जटिल कार्य हैं। ये सभी कार्य आपस में अन्तर्व्याप्त हैं। हाँ, इन सभी कार्यो के मूल में एक कार्य अवश्य पाया जाता है, वह है- ‘निर्णयन।’

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