रविवार, 21 जून 2009

नमक उद्योग के बढ़ते कदम

नमक उद्योग के बढ़ते कदम


नमक शब्द का अंग्रेजी पर्याय `साल्ट´ लेटिन के सेल शब्द से बना माना जाता है। इससे ही `सेलरी´ शब्द की उत्पत्ति हुई। रोमन सैनिकों को नमक के रूप में वेतन का अंश दिया जाता था। एक समय वह भी था जब प्राचीन ग्रीक में नमक का प्रयोग मुद्रा के रूप में किया जाता था। इथियोपिया के चन्द सुदूर क्षेत्रों में नमक आज भी पैसे के रूप में चलन में है। भारत के गढ़वाल क्षेत्र के ऊँचे पहाड़ी क्षेत्रों में लड़की शादी के समय अपने मायके से नमक छिपाकर ले जाती थी, ताकि वह ससुराल में चुपके से नमक के साथ रोटी खा सके क्योंकि सामान्यत: बहुओं को नमक नहीं दिया जाता था। 2,200 ईसा पूर्व चीन के राजा िºसआ यू लिवीद ने सबसे पहले नमक पर कर लगाया। अब कर की बात चल पड़ी है तो यह भी बता दें कि अंग्रेजों ने भारत के नमक उद्योग को बर्बाद करने के उद्देश्य से ही नमक उत्पादन पर भारी-भरकम कर लगा दिया था। वह अंग्रेजों के जमाने की बात थी जब प्रेमचन्द की कहानी नमक का दारोगा लिखी गई थी। उस कहानी से ही स्पश्ट होता है कि नमक उन दिनों कितने नियंत्रणों के अधीन था। महात्मा गांधी ने इसी नमक को स्वतंत्रता संग्राम में सत्याग्रह के हथियार के रूप में प्रयोग किया। आज जबकि हम प्रथम स्वाधीनता संग्राम के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं। हमारे लिए बड़े हर्ष की बात है कि वर्ष 2005 में हमने अब तक का रिकॉर्ड 199.24 लाख टन उत्पादन करके 32 देशों को नमक निर्यात किया है। वर्तमान में हमारा नमक उद्योग उत्पादन के दृष्टिकोण से विश्व में तीसरे स्थान पर है। प्रथम स्थान पर संयुक्त राज्य अमरीका है तो दूसरे पर चीन। भारत ने 146.44 लाख टन की घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करके 32.04 लाख टन का निर्यात भी किया है। भारत से लगभग 25 देशों को नमक निर्यात किया जाता रहा है। वर्ष 2005 में भारत से नमक आयात करने वाले 32 देश हैं, अर्थात नए आयातक देशों तक हमारी पहुँच बढ़ी है। बांग्ला देश, भूटान, नेपाल, चीन, हांगकांग, इंडोनेशिया, जापान, कोरिया, कुवेत, लाइबेरिया, मालदीव, मलेशिया, मोरीशस, न्यू गुआना, फिलीपीन्स, कतर, सिंगापुर, सिरोलीयन,श्री लंका, थाइलैण्ड, यू.ए.ई., वियतनाम, सेन्ट्रल अफ्रीका, मस्कट, दक्षिण अफ्रीका, ब्रूनी दारू सलम , केन्या, साइक्लस, आस्ट्रेलिया, इवोरी कॉस्ट, सऊदी अरब, उत्तरी कोरिया आदि देशों ने भारत से नमक का आयात किया। वर्ष 2005 में अब तक का उच्च उत्पादन रहा है जो भारतीय नमक उद्योग के इतिहास में मील का पत्थर कहा जा सकता है। वर्ष 2005 में 199.24 लाख टन उत्पादन हुआ। नमक उपायुक्त श्री एस.सुन्दरेसन का मानना है कि उत्पादन 20 मिलियन टन लक्ष्य बिन्दु को पार कर सकता था किन्तु 26 दिसम्बर 2004 को तमिलनाडु व आंध्रप्रदेश के तटीय इलाकों में सुनामी के कारण नमक क्षेत्रों में काफी क्षति हुई। दूसरी ओर राजस्थान में भी अनिश्चित मौसमी परिस्थितियों के कारण उत्पादन पर असर पड़ा। हमारी उदारीकरण व लाइसेन्स मुक्त करने की नीति का ही परिणाम है कि स्वतंत्रता के वर्ष 1947 में नमक उत्पादन 19.29 लाख टन था जो साठ वर्षो में दस गुने से भी अधिक हो गया है। जो अभी तक का ऐतिहासिक उत्पादन स्तर है।



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