शुक्रवार, 9 जनवरी 2015

जीवन प्रबन्धन के आधार स्तम्भ-13

संतुलन व्यक्ति के विकास व सफलता का आधारः


व्यक्ति के कर्तव्यों में तुलना करने से सदैव बचा जाना चाहिए क्योंकि प्रत्येक कर्तव्य अपने आपमें महत्वपूर्ण होता है। व्यक्ति को अपने कर्तव्यों के निर्धारण के समय संतुलन के सिद्धांत को ध्यान में रखना चाहिए। संपूर्ण प्रकृति ही संतुलन पर टिकी है। असंतुलन किसी के भी हित में नहीं होता। महात्मा बुद्ध ने भी मध्यम मार्ग अपनाने की सलाह दी है। महात्मा बुद्ध द्वारा संकेतित मध्यम मार्ग भी संतुलन के सिद्धांत को अन्तर्भूत किये हुए है। कहने का आशय यह है कि व्यक्ति को अपने समस्त कर्तव्यों वैयक्तिक, पारिवारिक व सामाजिक का भली-भाँति पालन करना चाहिए। उसे प्रयास करने चाहिए कि उसके सामने कभी भी तीनों में से एक या कुछ के चयन और एक या कुछ को छोड़ने का अवसर न आये। उसे अपने जीवन का प्रबंधन इस प्रकार करना चाहिए कि वह अपने सभी कर्तव्यों का निर्वहन संतुलित रूप से करता हुआ अपनी सफलता की राह को प्रशस्त करता रहे।

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