गुरुवार, 16 अप्रैल 2015

छोटे-छोटे काम करके ही देश-दुनिया में बड़े बदलाव

कन्फ्यूशियस का जवाब

कन्फ्यूशियस के समय चीन बड़े उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहा था।


 सभी के मन में अराजकता और रक्तपात फैलने का भय समाया हुआ


 था। सरकार का एक नुमाइंदा ऐसे माहोल में कन्फ्यूशियस को खोज 


रहा था। आखिर कार उसने  कन्फ्यूशियस को पा ही लिया। वे एक


 पेड़ के नीचे ध्यानमग्न बैठे थे। सरकारी प्रतिनिधि ने सम्मान सहित 


अभिवादन किया और उनके निकट बैठ गया। उसने बड़े ही अदब से


 निवेदन किया, ‘इस समय में हमें आपका मार्गदर्शन चाहिए। आप 


सरकार की सहायता करें, वरना यह देश बिखर जाएगा।’


कन्फ्यूशियस यह सुनकर कुछ बोले नहीं, सिर्फ मुस्करा दिए।


 वह व्यक्ति बोला, ‘आपने हमें सदैव कर्म करने की ही सीख दी है,


 आपने ही हमें देश और दुनिया के लिए हमारे कर्तव्यों के प्रति 


जागरूक किया है। आप देश को बचाने के लिए कुछ करें।



कन्फ्यूशियस ने कहा, ‘मैं देश के लिए प्रार्थना कर रहा हूँ। उसके


 बाद में मोहल्ले के व्यक्तियों की मदद करने जाऊँगा। अपने परिवेश से


 जुड़ा रहते हुए अपनी सीमाओं के भीतर काम करके ही हम सभी का 


हित कर सकते हैं। यदि हम दुनिया को बचाने के उपाय ही खोजते


 रहेंगे तो हमारे हाथ कुछ नहीं आयेगा। राजनीति से संबद्ध होने के 


बहुत से तरीके हैं, उसके लिए मुझे सरकार का अंग बनने की 


आवश्यकता नहीं है।’



    सन्देश- हम छोटे-छोटे काम करके ही देश-दुनिया में बड़े बदलाव 


ला सकते हैं, सिर्फ बड़ा सोचने से नहीं।



स्रोतः दैनिक जागरण सप्तरंग, पानीपत, दिनांक 15 अप्रेल 2015

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