बुधवार, 2 दिसंबर 2015

लिव इन रिलेशनशिप - शादी के बन्धन के बिना शादी की सुविधाओं का प्रबन्धन

मित्रों फ़ेस-बुक के माध्यम से मेरे पास एक प्रश्न आया था कि लीवींग रिलेशन क्या और कैसे होता हैं? उस प्रश्न का उत्तर देने का प्रयास कर रहा हूं। मेरे विचार में लिव इन रिलेशनशिप-
१- एक वयस्क स्त्री और पुरुष का बिना शादी के एक स्त्री और पुरुष के नाते साथ-साथ रहना ही लिव इन रिलेशनशिप कही जाती है। इसके अन्तर्गत वे एक-दूसरे के पूर्ण सहयोगी व साझेदार होते हैं। यह सामाजिक दृष्टिकोण से भले ही अच्छा नहीं माना जाता किन्तु गैर कानूनी नहीं है, क्योंकि किसी भी वयस्क स्त्री और पुरुष को यह निर्णय करने का अधिकार है कि वह कैसे और किसके साथ रहे किन्तु यह किसी के कानूनी अधिकारों को बाधित नहीं करना चाहिये।
२. यदि स्त्री और पुरुष समझदार है और एक-दूसरे के प्रति सहयोगी और समर्पित हैं तो लिव इन रिलेशन्शिप भी स्थाई हो सकती है। मुझे स्मरण नहीं आ रहा कुछ वर्षों पूर्व किसी प्रसिद्ध व सम्मानित संगीतकार का निधन हुआ था! उस समय प्रकाशित उनकी जीवनी के अनुसार वे बिना शादी के ही अपनी महिला मित्र के साथ शायद ५० वर्षों से अधिक रह रहे थे। इस प्रकार की समझदारी भरी रिलेशन्शिप वास्तविक रूप से शादी से भी अधिक स्थाई व पवित्र कही जा सकती है!
३-शादी करके भी विवाहेत्तर सम्बन्ध रखने वाले स्त्री-पुरुषों या कुआरें रहते हुए भी छिपकर कुकर्म करने वाले स्त्री-पुरुषों की अपेक्षा लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले स्त्री व पुरुष ईमानदार व साहसी हैं। वे एक दूसरे पर भार नहीं हैं, एक दूसरे की स्वतन्त्रता में बाधक नहीं हैं; उन्होनें किसी बाध्यता के अन्तर्गत नहीं बल्कि एक-दूसरे को दिल से स्वीकार किया है।
४- बिना शादी के साथ-साथ रह्ते हुए भी उनके बच्चे अवैध नहीं माने जायेंगे और बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी दोनों की ही होगी।
५- आपसी प्रेम रहते तो किसी प्रकार की समस्या ही नहीं है किन्तु विवाद होने पर किसी प्रकार का सामाजिक व कानूनी संरंक्षण उपलब्ध नहीं होता कितु अलग होने के लिये शादी शुदा व्यक्तियों के लिये दुष्कर व दर्दीली कानूनी प्रक्रिया के पालन की आवश्यकता भी नहीं पड़ती।
६- सामाजिक दृष्टिकोण से लिव इन रिलेशन्शिप सामाजिक व पारिवारिक ताने-बाने को कमजोर करती है किन्तु वैयक्तिक स्वतन्त्रता के हिमायतियों के लिये यह व्यवस्था शादी के बन्धन में बंधे बिना, शादी के अधिकारों व कर्तव्यों के भार को उठाये बिना सुविधाओं का उपयोग किया जा सकता है और जब चाहे तब बिना किसी कानूनी पचड़े के अलग हुआ जा सकता है। 
७- लिव इन रिलेशन शिप समाज व परिवार के अहित में किन्तु तात्काकालिक रूप से व्यक्ति के हित में प्रतीत होती है!
८- यदि दोनो स्त्री व पुरुष आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं तो दोनों के लिये कोई समस्या नहीं, किन्तु यदि एक आत्मनिर्भर नहीं है; तो उसके लिये इस प्रकार का सम्बन्ध जोखिम भरा है, क्योंकि इसमें कोई कानूनी, पारिवारिक या सामाजिक संरंक्षण उपलब्ध नहीं होता।
९- भविष्य में इस प्रकार के सम्बन्धों में वृद्धि होने की सम्भावना हैं क्योंकि भारतीय कानून महिलाओं के पक्ष में एक-पक्षीय बनते जा रहे हैं औए वर्तमान की कुछ चालाक व शातिर दिमाग महिलायें ऐसे कानूनों का दुरुपयोग कर व्याक्ति, परिवार व समाज के लिये समस्यायें खड़ी करने लगी हैं। ऐसी स्थिति में पुरुष शादी करने से डरने लगेंगे; यही नही कुछ आधुनिक आत्मनिर्भर महिलायें शादी को अपनी स्वतन्त्रता में बाधक समझने के कारण लिव इन रिलेशन्शिप में रहना ही अधिक उपयुक्त समझने लगीं हैं।
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