शनिवार, 15 फ़रवरी 2014

‘ज्ञानवृद्धस्य वयः न समीक्ष्यते’

 वर्तमान प्रबंधन के युग में प्रबंधन का प्रयोग सभी क्षेत्रों में देखा जा रहा है। साहित्य के क्षेत्र में प्रबंधन सूत्रों का प्रयोग करके नए खिलाड़ी बेस्ट सेलर के खिताब से नवाजे जा रहे हैं। आविष्कारों के लिए नए-नए कम उम्र बच्चों के मॉडलों को देखा जा सकता है। बच्चे भी आजकल बहुत अच्छा कर रहे हैं और नई पीढ़ी के संचार माध्यमों के कारण वे समाज के सामने प्रस्तुत भी हो रहे हैं। सामाजिक प्रयासों के अन्तर्गत युवक-युवतियों के प्रयासों को सराहना मिल रही है। राजनीतिक क्षेत्र में जितनी लोकप्रियता युवा प्रयासों से अरविन्द केजरीवाल ने प्राप्त की है। वह राजनीतिक पण्डितों के लिए आश्चर्य का विषय है। वास्तव में विज्ञान का जीवन में प्रयोग ही तकनीक है और तकनीक और प्रबंधन वे जादू की छड़ी हैं,जिनका साथ-साथ प्रयोग करके कुछ भी प्राप्त किया जा सकता है।
           प्रोद्यौगिकी और प्रबंधन के क्षेत्र में प्राचीन कहावत सटीक बैठती है- ‘ज्ञानवृद्धस्य वयः न समीक्ष्यते’ अर्थात ज्ञान के क्षेत्र में आयु के आधार पर सम्मान नहीं मिलता। यही सूत्र प्रबंधन व तकनीकी के क्षेत्र में भी लागू होता है। वास्तव में ज्ञान का वास्तविक जीवन में प्रबंधन के साथ प्रयोग ही तो नवीनतम् तकनीक है। प्रबंधन का जादू ही है, जो एक आन्दोलन एक अज्ञात व अपरिचित नौजवान को दिल्ली की मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँचा देता है। कुछ कर गुजरने की ललक है, जो मुख्यमंत्री की कुर्सी भी उन्हें बांध नहीं पाती और समाज के प्रति अपने सपनों को पूरा करने की खातिर कांग्रेस और भाजपा जैसी धुरंधर पार्टियों की रणनीति को धता बताते हुए कुर्सी को ठोकर मारकर फिर मैदान में आकर जनता को ललकारते हैं और स्वयं जनता को साथ लेकर उसके हित में काम करते हैं। 
          आप बता रही है कि हम अन्दर जाकर देख चुके हैं- हमाम में सब नंगे हैं। राजनीति के क्षेत्र में वास्तव में आप वह निष्कपट व निडर बच्चा है, ‘जो इंगित करके चिल्लाता है, अरे! राजा तो नंगा है।’


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