शनिवार, 3 जुलाई 2010

मानव संसाधन प्रबंध के उद्देश्य

Objectives Of Personnel Management




प्रबंध विज्ञान का एक सर्वमान्य सिद्धान्त है कि प्रत्येक उपक्रम में किया जाने वाला प्रत्येक कार्य किसी न किसी रूप में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से उपक्रम के उद्देश्यों की प्राप्ति में योगदान करे ( All Worke Performed In An Organization Should In Some Way, Directly Or Indirectly, Contribute To The Objectives Of That Organization. ) सेविवर्गीय विभाग उपक्रम का ही अविभाज्य अंग होता है। अत: उसे सामान्य उद्देश्यों की पूर्ति में सहायक होना चाहिए।

अत: मानव संसाधन के उद्देश्यों की चर्चा करने से पूर्व उपक्रम के उद्देश्यों का ज्ञान प्राप्त कर लेना उपयोगी रहेगा। सामान्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के उद्देश्य निम्नलिखित होते हैं :-

1. उपभोक्ता द्वारा स्वीकार योग्य वस्तुओं तथा सेवाओं का उत्पादन कर वितरण की समुचित व्यवस्था करना;


2. उपक्रम के स्वामियों तथा विनियोक्ताओं को लाभ के रूप में उचित प्रत्याय प्रदान करना;


3. कर्मचारियों के सभी वर्गो को उचित वेतन/मजदूरी प्रदान कर उनके वैयक्तिक मूल्यों (values), जैसे, उनकी धार्मिक मान्यताओं व संस्कृति आदि को उचित सम्मान व अवसर प्रदान कर सन्तुष्टि प्रदान करना;


4. सामाजिक उत्तरदायित्वों का निर्वाह करना; तथा


5. उपर्युक्त सभी उद्देश्यों को प्रभावकारी एवं मितव्ययी रूप से प्राप्त करना।



मानव संसाधन उद्देश्यों का अध्ययन निम्न वर्गीकरण के आधार पर किया जाना उपयोगी रहेगा :-

I. सेवा उद्देश्य - उपक्रम द्वारा समाज को उचित मूल्य पर अच्छी वस्तुओं तथा सेवाओं की आपूर्ति करना मूलत: सेवा उद्देश्य है। किसी भी उपक्रम का यही उद्देश्य प्रमुख होता है। अत: मानव संसाधन प्रबंध जो सामान्य प्रबंध का ही एक अंग है और उपक्रम के उद्देश्यों में योगदान के लिए काम करता है, का प्रथम उद्देश्य वस्तुओं व सेवाओं के उत्पादन व वितरण के कार्य को कार्यकुशलता से करना होता है। मानव संसाधन प्रबंध का उद्देश्य कार्यरत व्यक्तियों को इस दिशा में अभिप्रेरित करना होता है।

II. व्यक्तिगत उद्देश्य - मानव संसाधन प्रबंध के लिए कार्यरत व्यक्तियों के व्यक्तिगत उद्देश्यों की प्राप्ति भी महत्वपूर्ण है। कार्यरत व्यक्तियों की संख्या काफी अधिक होती है तथा प्रत्येक स्तर के कार्मिकों के व्यक्तिगत उद्देश्यों में भिन्नता पाये जाने की संभावना अधिक होती है, जिसे प्राप्त करना दुष्कर कार्य होता है। ये उद्देश्य निम्न हो सकते हैं -

1. उचित मजदूरी, काम के घण्टे व कार्यदशाएं;


2. प्रबंध निर्णयों में सहभागिता;


3. आर्थिक सुरक्षा;


4. विकास के समुचित अवसर;


5. वैयक्तिक प्रतिष्ठा एवं मान-सम्मान; तथा


6. सकारात्मक वर्ग भावनाएं।

स्कॉट, क्लॉथियर एवं स्प्रीगल (scott,clothier and spriegal) के अनुसार, ``एक संगठन में मानव संसाधन प्रबंध, सेविवर्गीय प्रबंध, सेविवर्गीय प्रशासन अथवा औद्योगिक सम्बन्धों का उद्देश्य अधिकतम् वैयक्तिक विकास, सेवानियोजकों एवं कर्मचारियों एवं कर्मचारियों एवं कर्मचारियों के मध्य सौहार्द्रपूर्ण कार्यकारी संबन्धों की स्थापना तथा मानवीय सम्बन्धों को भौतिक साधनों के अनुरूप बनाना है।´´

गोयल तथा मेयरस के अनुसार सेविवर्गीय प्रशासन के निम्न उद्देश्य हैं-

1. मानवीय साधनों का प्रभावकारी ढंग से उपयोग;


2. संगठन के सभी सदस्यों के मध्य वांछनीय कार्यकारी सम्बंध;


3. अधिकतम् वैयक्तिक विकास।

किसी भी उपक्रम में उपक्रम तथा कार्यरत व्यक्तियों के उद्देश्यों को कार्मिक प्रबंध के कार्यक्रमों में भली प्रकार समाविष्ट किया जाना चाहिए।

3 टिप्‍पणियां:

Vivek Rastogi ने कहा…

बहुत अच्छा ब्लॉग, बहुत जरुरत है ऐसे कंटेंट की हिन्दी में।

0 तिरुपति बालाजी के दर्शन और यात्रा के रोमांचक अनुभव – १० [श्रीकालाहस्ती शिवजी के दर्शन..] (Hilarious Moment.. इंडिब्लॉगर पर मेरी इस पोस्ट को प्रमोट कीजिये, वोट दीजिये

अनुनाद सिंह ने कहा…

आपके लेख बहुत उपयोगी और ज्ञानवर्धक हैं। ये हिन्दी चिट्ठाजगत के अधिसंख्यक लेखों से अलग हैं जो बेकार की कविता (तुकबाजी) और बेकार के बासी समाचार परोसते रहते हैं।

डा.संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी ने कहा…

विवेक जी और अनुनाद जी प्रोत्साहन के लिये बहुत-बहुत धन्यवाद.